Tuesday, December 2, 2008

26, नवम्बर 2008 मुंबई धमाके

मुंबई मे जो हुआ वो भारत मे हुई आतंकवादी घटनाओ मे सबसे ऊपर आएगा।

इसे सरकार की कमजोरी कहा जाय या बदकिस्मती जब से कांग्रेस केन्द्र सरकार मे आई है तब से तब से सरकार के अनकूल नही हो रहा है बेचारे मनमोहन सिंह लेकिन हमे सिखाया गया है की जो किस्मत को कोसता है वह कमजोर होता है अतः मुंबई मे हुई आतंकवादी घटना के लिए सरकार ही जिम्मेवार है। हमारे देश मे खुफिया एजेंसी तो है लेकिन नाम के लिए जो घटना के बाद लकीर पीटती रह जाती है।
इन विस्फोटो के बाद भी हम सुधरने बाले नही है और कुछ समय तक हल्ला मचेगा जांच शुरू हो जायेगी जिसका परिणाम पता नही कब आयेगा। रेलवे स्टेशनों पर और सावर्जनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ जायेगी लेकिन कुछ समय तक ही यह मुस्तेदी दिखिगी और फिर हम सो जायेगे अगले धमाके की आवाज़ से जागने के लिए। आख़िर कब हमारी सहन शक्ति टूटेगी ।

प्रधानमत्री कहते है की आतंकबादी हमारी सहन शक्ति को हमारी कमजोरी न समझे। पाटिल साहब कहते है की बड़े शहरों मैं ऐसी घटना होती रहती है जरा उनसे से पूछिए की पूरी मुंबई धमाके से उड़ती तब उन्हें कुछ अहसास होता या जब कोई उनके परिवार का सदस्य शामिल होता, हद होती है ऐसे स्टेटमेंट की। धन्य है हमारे राजनेता

एक अमेरिका है जो अपनी सुरक्षा के नाम पर दो देश इराक व अफगानिस्तान को पुरी तरह से तबाह कर देता है और अभी भी पाकिस्तान में घुसकर तालिबानों को मार रहा है और एक हम है की वो हमे मारते जा रहे और हम पर कोई असर ही नही हो रहा। वो कहते भी होंगे हम तो तुम्हे ऐसे ही मारेंगे जो करना है कर लो।
अरे अब तो आर पार की लडाई हो जाने दो रोज रोज मरने से तो एक बार मरना अच्छा है पी औ के (पाक अधिकृत कश्मीर ) हमला कर के खत्म कर दो उन शिवरों को जहाँ आतंक पल रहा है जो होगा वो देखा जायेगा।
आप क्या सोचते है..........?

No comments: