भारत को दुश्मन को जवाब देने का दम नहीं है, विकिलीक्स का कहना है कि
भारत हमले बस सह सकता है। उसमें पलटवार करने का दम नहीं है। भारत की 'कोल्ड स्टार्ट' योजना बस कागजों तक सीमित है। ऐसा न होता तो वह 26/11 के बाद इसके लिए जिम्मेदार पाक को मुंहतोड़ जवाब दे देता...। अमेरिका भारत के बारे में कुछ यही सोचता है। विकिलीक्स की ओर से लीक किए गए एक संदेश से अमेरिका की इस सोच का पता चलता है।
भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे रोमर ने कहा था कि संसाधनों की कमी के कारण भारत के युद्ध के मैदान में अपनी 'कोल्ड स्टार्ट' योजना पर अमल करने की उम्मीद नहीं है। रोमर ने इस योजना को मिथक करार दिया था। रोमर ने कहा कि भारतीय थलसेना ने यदि कोल्ड स्टार्ट योजना मौजूदा स्वरूप में लागू की, तो इसके इसके मिश्रित नतीजे सामने आएंगे।
"कोल्ड स्टार्ट वह योजना है जिसके तहत देश में आतंकी हमला होने पर 72 घंटों में दुश्मन देश पर हमला कर उसके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत किया जा सकता है। भारत ने यह योजना 2004 में बनाई, लेकिन 2008 में मुंबई पर हमला होने के बावजूद उसे अमल में नहीं लाया गया। "
गौरतलब है कि इस सिद्धांत पर भारत में सहमति नहीं बन पाई है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने भी इसे पूरी तरह समर्थन नहीं दिया है।
रोमर ने यह भी कहा कि भारत ने 26-11 जैसा आतंकवादी हमला होने के बाद भी कोल्ड स्टार्ट सिद्धांत पर अमल नहीं किया। जबकि इस वारदात में शामिल आतंकवादियों के तार पाकिस्तान से सीधे जुड़े हुए थे।
लीक हुए इस संदेश में कहा गया है कि हमला होने के बाद भी भारत सरकार ने कोल्ड स्टार्ट योजना पर अमल नहीं किया, जो इसे किसी भी स्वरूप में लागू करने की दिशा में भारत सरकार की इच्छा को दिखाता है। इस योजना का अस्तित्व में रहना बस
भारत की जनता को आश्वस्त करना है और पाकिस्तान पर कुछ दबाव बनाना है।
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