गोधरा नरसंहार घटना के करीब नौ साल बाद इस मामले में 19 फरवरी को फैसला सुनाया जाएगा। इस घटना में 58 लोगों के जलकर मर जाने के बाद समूचे गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे।
इस मामले के विशेष सरकारी वकील जेएम पंचाल ने बताया कि मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश पीआर पटेल इस संवेदनशील मामले में 19 फरवरी को फैसला सुनाएँगे। उन्होंने इस मामले में पिछले साल सितंबर में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों की सुनवाई पूरी कर ली थी।
इस मामले में सभी आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, हत्या करने और साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की एस-6 बोगी में आग लगाने का आरोप लगाया गया था। यह घटना 27 फरवरी 2002 की है, जिसके तहत 58 लोग मारे गए थे। इनमें से ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे ‘कार सेवक’ थे।
गोधरा में जो हुआ वो सभी को पता है अब फैसला भी आने वाला है/ कहा जाता है कि गोधरा-कांड एक दुर्घटना है जब कि उसके बाद होने वाले गुजरात दंगे सोची समझी साजिश थी लेकिन मै कहना चाहता हूँ कि दंगे एक प्रतिकिया थी जब कि गोधरा एक सुनियोजित साजिश थी.
गुजरात में जो कुछ हुआ उसे सही तो नहीं ठहराया जा सकता क्यों कि उसमे दोषियों के साथ साथ निर्दोष भी मारे गए लेकिन वो क्यों हुआ हमें पहले वो देखना चाहिए और शुरुआत पहले किसने की ये देखना अति आवश्यक है
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